किसी प्रदेश की राजधानी में कानून-व्यवस्था चाक-चौबंद रखना और एक अनुशासन बनाए रखना हमेशा से अधिकारियों के लिए टेढी खीर रहा है। बावजूद तमाम दिक्क़तों के पुलिस द्वारा इसे बेहतर तरीक़े से अंजाम देने का भरसक प्रयास किया जाता है। साथ ही हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस के साथ-साथ किसी नागरिक की भी उतनी ही ज़िम्मेदारी है, बस ज़रूरत है तो थोडी जागरूकता की। इसी को ध्यान में रखते हुए डीजीपी विश्वरंजन साहब और आईजी डी.एम. अवस्थी साहब के मार्गदर्शन में पुलिस अधीक्षक रायपुर, अमित कुमार ने जन जागरण अभियान के तहत पांच प्रेरणादायक फिल्मों की सीरिज़ का निर्माण कराया।
पुलिस अधीक्षक अमित कुमार का मानना है कि पढ़ने और सुनने से ज्यादा, दिखने का असर होता है। हम उस घटना या विषय को ज्यादा जल्दी समझ पाते हैं जिसे हम देखते हैं क्योंकि उसे हम महसूस कर पाते हैं। उसकी छवि हमारे ज़हन में देर तक बसी रहती है। उनके मुताबिक इसे देखकर नागरिक अपनी उन ज़िम्मेदारियों के प्रति सजग होंगे, जिन्हे वे जानते तो हैं लेकिन उनका पालन नही करते या कहें बहुत गंभीरता से नहीं लेते। अगर वो इनके प्रति थोडा जागरुक हो जाएं तो निसंदेह अपराध ग्राफ में तेज़ी से गिरावट आएगी और आम नागरिक भी सहयोगी बन जाएंगे। पुलिस अधिक्षक के मुताबिक इसके निर्माण में सीएसपी रजनेश सिंह, बीबीएस राजपूत और उनकी टीम का विशेष सहयोग मिला।
इन फ़िल्मों का निर्माण देश की जानी मानी फ़िल्म निर्माण कंपनी जे.बी.कम्युनिकेशन द्वारा कराया गया है जिन्होने बेहद खूबसूरती से इन्हें फिल्माया है और बडे ही स्वभाविक तरीक़े से अंजाम दिया है।
छोटे–छोटे बच्चे स्कूटी और बाइक चलाते आजकल आम दिख जाते हैं। पर क्या आपने कभी सोचा है कि इन स्कूल जाने वाले बच्चों के हाथ में गाडी देकर आपने उसे और मुसीबत में डाल दिया है और साथ ही ज़िद्दी बनाना शुरू कर दिया है। इससे ये खुद तो परेशानी में आते ही हैं, दूसरों के लिए भी दुर्घटना का सबब बन सकते हैं। नाबालिगों को गाडी चलाने के लिए ना दें।
अक्सर देखा गया है कि नौकर रखते समय या मकान किराए पर देते समय पुलिस वेरिफिकेशन कराना लोग बेवजह का झंझट समझते हैं। जबकि यह आपकी सुविधा के लिए है। कभी भी घर के नौकरों या मेहमान के सामने घर में मौजूद सामान, ज़ेवरात और नकदी का हिसाब–क़िताब ना करें। यह आपके लिए घातक हो सकता है। इसके अलावा अपने पडोस में आने-जाने वालों पर नज़र रखें। किसी भी संदिग्ध गतिविधी की जानकारी अपने निकटवर्ती पुलिसकर्मी या स्टेशन में जाकर दें।
चालक नशे में (ट्रक ड्राइवर), नींद में (टेक्सी चालक) या फिर मोबाइल (आम आदमी, बाइक चलाते हुए, कार चलाते हुए) पर बात करते-करते गाडी चलाते हैं और टकरा जाते हैं। ये आपके लिए तो जानलेवा है ही साथ ही उसके लिए भी जिस बेचारे का कोई कुसूर नहीं है। दारू पीकर, नींद में या फिर मोबाइल से बात करते हुए ड्राइविंग ना करें। यह जानलेवा हो सकता है।
अक्सर देखा गया है कि ज़रूरत के समय आपको नहीं पता होता कि कहां संपर्क करें और किससे मदद लें। खासकर हाइवे पर किसी तरह की कोई मदद नहीं मिलती। पुलिस ने एक हाइवे हेल्पलाइन सेवा शुरू की है। इस हेल्प लाइन नंबर का इस्तेमाल करें।
जब कभी भी आप घर पर अकेली हों या कोई अपरिचित दरवाज़ा खटखटाए, सुरक्षा नियमों का ध्यान रखें । किसी अपरिचित के लिए दरवाज़ा ना खोलें, पहले जान लें कौन है और क्या चाहता है। किसी भी हाकर को या मांगने वाले को घर के अंदर ना आने दें। ऐसा व्यक्ति आपके घर की जानकारी लेकर किसी बडी दुर्घटना को अंजाम दे सकता है या फिर किसी बडी लूट का कारण बन सकता है।